क्या हुआ 'दर्शन ' जो तू साये से मोहब्बत करता है ,
जो ना दिखा, ना मिला, हर कोई उसी की इबादत करता है ,
कलियाँ ना थीं, फिर भी शोख ही रहा दिल अपना ,
खुश ही रहता है जो फूल हवा से शरारत करता है ,
चेहरे की कशिश से तो यूँ भी मोहब्बत हो जाती है अक्सर ,
जिसे एहसास से मोहब्बत हो, वो तो बस क़यामत करता है ,
दिल पे राज करने को, दिलबर का पास होना ज़रूरी नहीं होता ,
इश्क़ में वो हुनर है, कि वो दूर ही से सियासत करता है ,
वो ना थी, ना है, ना होगी, हँस देते हैं समझाकर खुदको इस तरह,
ना gifts, ना coffee, ना खर्चा, 'दर्शन' तू तो काफी किफ़ायत करता है ।
हा हा :)
- दर्शन दवे
Enter your comment... so beautiful sir .
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