Thursday, 6 February 2014

Will ( वसीयत )

कहते हैं ऊपरवाला सबको किसी मक़सद से इस जहान में भेजता है ,
उसका मक़सद वो जाने , अपना मक़सद हर इंसान सहेजता है ,
उसको जब लगता है , आपका काम ख़त्म , वो बुला लेता है ,
आप जागने का मानस बना रहे होते हैं , वो सुला लेता है ,
अधूरी ख्वाहिशें दिखती है , मैं जिस तरफ नज़र घुमाता हूँ ,
पर उससे पहले की निमंत्रण आ जाए , मैं विल बनाना चाहता हूँ ।

राजेश की hard disk और सौरभ की CD वापस दे देना ,
फोटोग्राफर से पापा की enlarge करवाई फोटो ले लेना ,
पारसी आंटी की पिचान्वी सालगिरह पर जाना ,
और मुझे वे कितनी gorgeous लगती थीं , उन्हें बताना ,
समर से कहना मैंने उसकी पोलियो पे जीत से प्रेरणा ली थी ,
और दिव्या से कहना मैं शर्मिंदा हूँ कि मैंने उसकी कहानी translate नहीं की थी ,
घर पे दो storey उठाके , किरायेदार रखने थे ,
राज़ है की मुझे continental और thai भी चखने थे ,
ओह ! फिर विल से भटक गया .....

तुम तो मेरी poetry की किताब छपवा देना ,
और पापा की पुण्यतिथि पर दस घड़े प्याऊ पर रखवा देना ,
रूही पे स्कूल में मुझे crush था , उसे कह सकते हो ,
और विमला मौसी से कहना , अब आप मेरे घर में रह सकते हो ,
Body बनाना चाहता था , फिल्मों में जाना चाहता था ,
लन्दन में कुछ साल रहता मैं ,
मम्मी से फिर रेडियो पर गाने को कहता मैं ,
एक गोल घूमती कुर्सी और एक ऑफिस का सपना था ,
और हर उस शक्स को ढूँढता जो जीवन में कभी अपना था ,
किसी ट्री हाउस में बैठके साहित्य लिखता ,
और सदी की सबसे क़ामयाब फिल्मों में हीरो दिखता ,
माँ को दुनिया घुमानी थी ,
किसी बहुत अच्छी लड़की के साथ जिंदगी बितानी थी ,
एक छोटा सा अपना द्वीप खरीदना था ,
और ख़ुदका हेलिकॉप्टर terrace पे रखना था ,
अपने फार्म हाउस पर गौशाला खोलनी थी ,
मुझे शराब से कितनी नफ़रत है ,ये बात खुलके बोलनी थी ,
किसी दिन मेरे गाँव के घर में , खाली बैठा TV देखना चाहता था ,
और माँ के साथ हीटर पर , सर्दी में हाथ सेकना चाहता था ,
कुछ चुनिन्दा दोस्तों को detail में थैंक्स करना था ,
और कुछ मजबूर बेघरों के घर का लोन भी भरना था ,
मैं रोज़ बिल्डिंग में क्रिकेट खेलना चाहता था ,
और 700 – 800 रन पेलना चाहता था ,
कवि सम्मेलनों में जाना चाहता था ,
और मैं भी सबको कुछ सुनना चाहता था ,
वो जो मुझे चाहती है , उससे कहना था ,
कि मुझे भी उसके ज़हन में रहना था ,
जीवन की नदी के भँवर में फँसे रहे सदा ,
वरना मुझे तो बड़े सुकून से बहना था ,
इस सब में बाँटना कम और माँगना ज़्यादा दिख रहा है ,
आज सपनों के खाली पन्नों पर , एक मुफलिस अपनी विल लिख रहा है ।