Monday, 5 October 2015

इश्क़ करूँ पर .......




अब मोहब्बत करना चाहता हूँ मैं इंसान की तरह ,
जानबूझकर, होश में, पर नादान की तरह 

सबने ढूँढा, रखा, पूजा मुझे अपनी मुरादों के लिये ,
फिर समन्दर में बहा दिया किसी भगवान की तरह 

इश्क़ करूँ पर दिल को ख़बर ना हो इन तमाशों की ,
क़ाफ़िर मिलता रहे ख़ुदा से, अंजान की तरह 

एक आँसू ना खर्चू कोई दिल खरीदने के लिये ,
इस बार सौदे करूँ किसी बेईमान की तरह 

रिश्तों की खबर तो हो, क़द्र नहीं, अब ये आदत हो जाए,
रखूँ , तोडूं , फेंकूं उन्हें सामान की तरह ,

इश्क़ पलता है जेबों में, बाज़ार में बिकता है बेधड़क ,
अब प्यार भी होने लगा है नफे - ओ - नुकसान की तरह 

फेसबुक व्हाट्सएप पर कई क़तारों में हैं सब सबकी ,
अब मोहब्बतें होती हैं, कई जिस्म कई जान की तरह । :)

                                                              - दर्शन दवे