Thursday, 1 August 2013

कुत्ते जान गए शेरों की कमज़ोरी । …




रात को ११ बजे जयपुर की सरस दूध की डेरी खुली रहती है.…और कतार में अक्सर दफ्तर के बैग लिये खुली टाई वाले थके मान्दे लोग दिखते हैं या अपना ऑटो रिक्शा साइड में रोक कर नींद से बुझती आँखों वाला कोई ड्राईवर। चेहरा देख कर कोई भी बता सकता है कि यहाँ कोई बॉडी बिल्डर या मिल्क शेक का शौक़ीन नहीं खड़ा ,हर आधा लीटर की थैली में या तो सोये बच्चों को जगा कर आधा आधा पिला देने का संतोष है, या माँ बाप को रात की आखिरी गोली के साथ गरम गरम देने का सुख। कल दूध नहीं आया था सो मेरा हाथ भी काउंटर के आधा अन्दर था पैसे लिए हुए…। "एक लीटर गोल्ड …"  मैंने कहा.… इससे पहले काउंटर पे बैठा आदमी अपनी जगह से हिलता, एक लम्बा सा हाथ झट से काउंटर में घुस गया.…. "ला दो छास इधर दे पहले"…. एक लम्बा चौड़ा सा छोटी दाढ़ी में एक साथ चार लोगों को धक्के से साइड में करके एक 23-24 साल का लड़का बिना किसी फ़िक्र के काउंटर वाले से ऊँची आवाज़ में बोला। बड़े ध्यान से उसने अपना प्रादेशिक लहजा संभाल के दागा… उससे असर ज्यादा होगा उसे भरोसा था। मैं जो बोलने ही वाला था वो बदकिस्मती से मेरे पीछे खड़े अधेड़ उम्र के सज्जन ने बोल दिया। …'भैया लाइन में आ जाइये ' …मुझे लगा शायद इतना काफी है सो मैं चुप रहा.… "बताऊँ क्या तन्ने लाइन"  उसका जवाब था। …य़े अक्सर फिल्मों में फाइट सीन की शुरुआत का संवाद होता है।  वो सज्जन जो उसके पिता की उम्र के थे फिर बोले "मगर ये तो गलत है,हम भी तो लाइन में खड़े हैं "….उस लड़के ने अपना फ़ोन निकाला और कहा "जादा बकवास ना कर ,फ़ोन करूँ क्या ?" …" किसे ? " उन्होंने पूछा। …लड़का बोला  "अपने हॉस्टल ,यहाँ पीछे ही है,पूछ ले इस काउंटर वाले से के हम कौन हैं क्या हैं "… उसकी दिलेरी का ये बड़ा कमाल डायलॉ था। उसमें कितना दम था वो तो दिख गया पर ये अकड़ उस बन्दरफ़ौज की थी जो "हो हो हो करते हुए किसी पे हॉकियाँ  बरसा देते हैं,किसी की दुकान को आग लगा देते हैं , किसी की बीवी और बहन को साड़ी उतारने की धमकी दे जाते हैं हमारे जयपुर में …  "

यहाँ अलग अलग जाति और जनजातियों के अलग हॉस्टल हैं इसलिए ये गुट और जवानी के नशे में चूर लौंडे गैंगनुमा भीड़ में जुट कर अक्सर लोगों से भिड़ते हुए पाए जाते हैं ,यहाँ जातिवाद अपने सबसे घिनौने रूप में पनपता है और यहाँ लड़के अगर कुछ होते हैं तो अपनी जाति के भड़काऊ पोस्टर और कुछ  नहीं , ये कभी उस शहर के नहीं बन पाते  । …और फिर उन्हें इत्मीनान ये कि यहाँ का कोई IG  या DIG या DYSP उनका चाचा ताऊ लगता है……।

छोटे छोटे गाँवों से राजधानी में पढ़ने आये एक गुट के एक ही हॉस्टल में बसे हमारे देश के इन भावी कर्णधारों में से कुछ  , आतंकियों का चेहरा बना कर उस शहर में I-कार्ड की तरह अपने हॉस्टल और बन्दर फ़ौज की धमकियाँ देते पाए जाते हैं। …और भुगतते हैं शहर के आम लोग…

यूनिवर्सिटी में चुनाव का माहौल है आजकल। …जीपों में भरे लड़के हर ट्रैफिक रूल तोड़ कर सामने से आते शहर के बेक़सूर लोगों को आँख दिखाते हैं,कहीं सड़क के बीचों बीच अपनी जीप खड़ी करके ये इंतज़ार करते हैं कि कोई बोले तो हम अपनी इस बन्दर फ़ौज की काबिलियत दिखाएँ । यहाँ की यूनिवर्सिटी का ट्रैफिक सिग्नल एक मात्र ऐसा सिग्नल है जयपुर में जहाँ कोई लड़का रेड लाइट पर नहीं रुकता क्यूंकि जवानी और हेरोइस्म का मतलब ही खलनायकों  जैसा बर्ताव करना है……. ये वो बंदरर्फौज है जिसमें भीड़ में आते ही ताक़त आ जाती है…. जिन्हें बदतमीजी करके , गुंडागर्दी करके , तोड़ फोड़ करके , नियम तोड़ के लगता है कि वे युवा हैं, ताकतवर है। कल ही दिन में जब मैं यूनिवर्सिटी गया तो लड़कों से भरी एक जीप जाने वाले रास्ते से आती हुई मेरे सामने ऐसे खड़ी हो गई कि ,जाएगा तो तू ही पीछे। …. पुलिस वालों की समझाइश पर वे मेरी गाड़ी को लगभग छूते हुए निकल गए। ऐसी ही कोई टुच्ची हरकत करके फिर उनकी नज़र पास से गुज़रती लड़कियों पर पड़ती हैं कि देखा मैंने अभी अभी क्या तीर मारा ? …… पुलिस वाले असहाय से देखते रहते हैं और आने जाने के दोनों रास्तों में अवरोधों की तरह हमारे चुनावी हीरो दुस्साहस के नशे में चूर ,हवा में उड़ते नज़र आते हैं।


जब भी आप इस तरफ से गुजरेंगे जहाँ हमारे देश की भावी पीढ़ी खड़ी होती है, हमारा भविष्य, हमारे भविष्य के नेता और उनके चमचे खड़े होते हैं , तो एक ज़बरदस्त आतंक महसूस होता है , आपको पता होता है कि चुपचाप अपनी गाडी यहाँ से निकाल लो वर्ना ग्रीन लाइट पर बेफिक्र अंडरवर्ल्ड dons  सा भाव लिए सड़क पार करते लड़कों को अगर खरोंच भी आ गई तो आपको समझ आ जाएगा कि इनके माँ बापों ने इन्हें किस दिन के लिए पैदा किया है।


बहराल हुआ ये कि जब मैंने काउंटर से हाथ नहीं निकाला तो उसने  मेरी तरफ घूर के देखा और ज़ोर से कहा "हट",… अब वो मुझे घूर रहा था और मैं उसे , मैं हाथ हटा लेता तो इस शहर में रहने की तमन्ना मर जाती इतना मुझे पता था …. मैंने बस इतना सोचा कि इतने  बरसों में कभी मुंबई में ऐसा एक दिन नहीं आया कि मुझे यूँ किसी की ओर देखने की ज़रूरत पड़ी हो  और आज अपने ही शहर में एक लीटर दूध  के लिये हो सकता है कि मेरी माँ को आधा घंटे बाद किसी पुलिस स्टेशन या अस्पताल में बुलाया जाए। …हालत गंभीर होने के आसार देखते ही काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने मुझे दूध और उसे छास बिलकुल एक साथ थमा दी। अंकल ने मुझे यूँ अड़ा देखकर फिर कहा "ये हाथ क्यूँ हटा ले "? वो लड़का जाता जाता फिर रुक गया और उन्हें और मुझे घूरता हुआ बस ऐसा इशारा करके चला गया जैसे कह रहा हो कि रुको अभी बताता हूँ …… बाकी खड़े 20  लोग यूँ दूर दूर हट रहे थे जैसे वे वहाँ हैं ही नहीं।  …

एक बात आज मैं समझ गया था कि किसी भी बन्दर फ़ौज या गुंडे की सबसे बड़ी ताक़त होती है ये विश्वास कि यहाँ कोई किसी का साथ नहीं देगा, हम 5 हैं और ये 50 फिर भी कोई एक पिटता रहेगा और कोई नहीं बोलेगा। । प्लीज़ एक होकर आपत्ति जताना सीखिए ,  अगर हम एक दुसरे का साथ देने का ये मेसेज स्प्रेड कर दें तो सोचिये हम सब कितने सेफ हो जाएँगे। … कौन सा गैंग हमारी भीड़ से ज्यादा ताक़तवर होगा। …. मुझे माँ को कोई और झटका नहीं देना था इसलिए उसलिये  आदि इत्यादि…. बहाने भी हो सकते हैं पर मैं आज solution दे रहा हूँ,क्यूँकी हम



सब एक नेकी की जंग लड़के अपने परिवारों को संभालने घर भी लौटना चाहते हैं , खून से लथपथ नहीं, ये भी सच्चाई है, इंसान खुद से ज्यादा अपनों के लिए डरता है, अपनी जिम्मेदारियों के लिये  ।अगर खुद हीरो की तरह जीना चाहते हैं तो किसी भी सही अजनबी के साथ असामाजिक तत्त्व पर टूट पड़ने में ज़रा देर न कीजिये वर्ना उसकी हार के साथ फिर आपकी आज़ादी और हिम्मत की भी हमेशा के लिए हार हो जाएगी। ….

हर बच्चा जो इस शहर में पढने आया है हमारा मेहमान है, पर दूर दूर तक ये बात पहुँचा दीजिये कि ये शहर dustbin नहीं है और यहाँ का हर इंसान कीड़ा मकोड़ा नहीं है…. ये तय कर लीजिये की तुम कोई हों , कहीं के हों ,और कितनी भी तादाद में हों, अगर इस शहर के किसी बुज़ुर्ग ,महिला, दुकानदार या सड़क पर चलने वाले व्यक्ति से बदतमीजी की तो तू फिर किसी सरपंच की औलाद हो या विधायक की, तू पिटेगा  …वो अपने बच्चों को इस शहर में पढने भेजें तो ये समझा के भेजें कि वो जंगल नहीं है ,वहाँ तमीज से रहना वरना जयपुर की पब्लिक बीच सड़क में पीटेगी। …… please एंटी सोशल एलिमेंट्स को दबाना सीखिए तुरंत सब मिलके मौके पर वरना हरदम अपने ही इलाके में यूँ ही कीड़े मकौडों की तरह जीने को मजबूर हो जाएँगे। ….


जब में दूध लेकर अपनी गाडी की तरफ जा रहा था तो देखा कि वो ही लड़का एक जीप में बैठे 4 और लड़कों के साथ छास पी रहा था।जीप पर election के बैनर लगे थे  … उसने मुझे देखते ही बाकी लड़कों को इशारे से बताया कि ये वही है और उधर से बोला …. "सुन हाथ हटा लिया कर जब बोले तो,हम **** हॉस्टल के छोरों को तू जानता नहीं है " उसने अपनी जाति  और अपने हॉस्टल का नाम लेकर फिर आवाज़ ऊंची  की ,  मैं नहीं रुका। … मुझे दुःख था कि मेरे ही शहर में मैं इतने साल बाद लौटा हूँ और मुझे इनसे आशंकित रहकर जीना होगा ?  ….

सालों पहले कॉलेज में, दो हॉस्टल के लड़कों की ऐसी ही बे सर पैर की लड़ाई में कुछ लाश से बन चुके लड़कों को मैं अपनी Bike पर डाल कर अस्पताल ले गया था। … कोई और तैयार नहीं था इसलिए मैंने बार बार चक्कर लगाये थे घटनास्थल से अस्पताल तक के। … उन लड़कों की जाति भी वही थी,जिस जाति का वो लड़का आज मुझे अपनी परवरिश से परिचित करवा रहा था।  मैंने कभी जात पात को तूल नहीं दिया …. पर तब मुझे ये नहीं मालूम था कि यहाँ ये इतनी बड़ी rocket science है । …. ये ज़रूर आया ज़हन में कि अगर आज ये यहाँ खून से लथ पथ पड़ा होता तो मैं शायद  इसे उठाते वक़्त कोई सरोकार या परोपकार महसूस नहीं कर रहा होता…. ,और ये हिकारत उसने खुद मुझमें  भरी थी । … प्लीज़ अगर कोई किसी से भी बदतमीज़ी कर रहा हो.…आपसे ना हो ,आप अकेले हों तो नज़रंदाज़ कीजिये पर अगर पब्लिक प्लेस पर हैं और कोई एक भी हिम्मत दिखाए तो उसे अकेला मत छोडिये। …हतोत्साहित करना सीखिए वहीँ हर एंटी सोशल एलिमेंट को.…. हम सब सेफ हो जाएँगे। अहिंसा बहुत बड़ी ताक़त है , अगर ये सामने वाले को पता हो और वो आपको उसे आजमाने के लिए जिंदा छोड़े। भीड़ में डिफेन्स के लिए उठाए कदम से शायद किसी एक अकेले की जान बच सकती है , पुलिस केस हो जाए तो मौके पर कई गवाह तैयार खड़े हो सकते हैं , और इतने लोगों की ताक़त देख कर कोई बेहूदगी करते करते रुक सकता है , मगर एक होना पड़ेगा यार.…. वर्ना हमें तब तक पता नहीं चलेगा जब तक हमारे पिता , बेटा या बेटी घर लहूलुहान नहीं पहुंचेंगे सिर्फ इसलिए कि बाकी लोग चुप रहे। …यकीन मानिये भीड़ की दखल से हरदम असामाजिक तत्वों की हिम्मत टूटती है। …… बुरे सब एक जुट हैं , अच्छों को एक जुट होना पड़ेगा यार। …. अटैक नहीं पर डिफेंड करना तो सीखना ही पड़ेगा।



Laura,....most beautiful and the only girl,I ever chased ... .......

After a very long phase of immense trauma my family and I still had a worse phase to witness.... dad succumbed to the shock.I was sitting besides him in the ICU for 32 days.He was on the ventilator and had to bear the brunt of something he didn't deserve,he was innocent.I just wanted him to come out of that horrifying ICU at any cost.All I got to see there were those... 100 people who interacted with me some minutes , hours or days before passing away,being taken on stretchers one after the other vacating the beds for other half alive patients ,same machines , noise of several electrocardiogram beeps and stretchers and there I was sitting day and night just watching the same thing happen to dad.


I bought a laptop and an internet dongle to get in touch with the doctors and survivors from across the world.After putting some holy ash,petals and water that people and I had got for him from remotest areas of..... somewhere, over or around his body, I would sit with my laptop and for hours speak with people from all over the world.And then I just happened to halt at one Youtube account.....Laura....with a longer tongue twisting surname McCracken ,she attracted me because she had Pink hair and a cat on her lap when I just happen to click her video and she called herself WAWA.....
She looked beautiful but there was something which I sensed was different ..... 


She had cancer,small cell stage 4 lung cancer.....and I knew this video was not usual.....she was very conscious ,too unsure about what that video would do for her,or may be what she would be doing in the video....she was making a series of videos of changes in her state in due course of chemotherapy ,every video shook me,may be because I was sitting in a death roller coaster with dad....but she was a rockstar....and then a couple of more videos where she with all the uncertainty was talking about the scar of needles on her chest,her lost hair,her new wigs , her cats,Toby and Benjamin and Frederick the hamster,she would smile,giggle and take everything like a child's play with all that pain and reality that had already sunk in,she would describe worrisome symptoms with a carefree smile ,she would talk about the car, her camera , the weather , she would as if make fun of the symptoms and physical changes she was going through and then she would say goodbye panting due to breathlessness.....

I was with her there and then......I wanted to tell her ...whoever she was in this world I was with her,because she had taught me to balance on the shaking lifeline with a smile..., to befriend those machines in the ICU, with emotions dripping around through wires and tubes',and to celebrate fear......she was from somewhere from the U.S where I have never been till date,and then just to be able to talk to her I made a Youtube account.
Before I could send her my first message,I realized she was nowhere..........

.....her last message was some 8 months back......I didn't want to lose her,she was my last hope.....my inspiration......and I was in a frenzy.....mad to find where and how she was or what happened to her......I tried to find her on the internet.....and ... I could.....she was on Facebook ........although I did but wasn't sure if sending her a friend request would be of any use....still I waited for 2 days but it wasn't accepted , I tried to find out about her family and could manage to find her father and sister ,without any realization I was begging them to tell me about Laura.....by then I had lost a lot in my life and this time I was angry .....and wasn't prepared to let Laura go.....Laura who...? I had no idea......there was no reply from her family .....I was completely heart broken and all I was doing for 4 days was just wanting to know what happened to her.....the fourth day I was completely shaken due to some painful anticipation and again logged in to watch her videos all over again when I saw a message in my Youtube inbox ...............................................................................It was Laura...... I was in tears.....



I remember to have sent her some messages with lots of 'plzz plzz' in them to reply.....and she did,with a very warm assurance that she was fine but ,had a complain.....why did I message her family....they came to know about her Youtube adventures......I knew I had something to blackmail her now if she doesn't reply in time..... In the ICU Laura was with me, as if all the time.She sent me some long heart felt messages to lend support,she encouraged me, strengthened me,shared the pain,and as is her habit she would suddenly divert from the topic and start talking about her office,cooking,cats or toys....as if what we were facing was least important.Its been 6 years of her Cancer.......stage 4 ! whichever stage...its backstage now,she has moved on...times have changed for her,for good.Recently on June 1st, 2013 she got married to her soul mate Trey.She has a dream of starting a toy factory...She knows about me without knowing me and I know her without knowing her...today we are friends,and we became friends in pain....so she is close to my heart, she will always be a darling and I have promised her I would be with her always

In her radiation and chemo days she colored her hair Pink because she was losing hair,and in one of her videos in 2008 she said ''I can't have radiation or surgery now but with chemo everything would work out,I think I have a real good chance,I'm not freaking out or anything,I'm pretty confident that I can do this,I have been feeling pretty good,I have been feeling well,I haven't been feeling sick at all , just a little pain,but now I have been allowed to exercise....and in the end of the video she said....I'm coming back.....peace...." and she came back.... Happy married life Laura ....




......and she lived happily ever after in my heart

RIP Laura McCracken ......


Laura Elizabeth McCracken - Dec 23, 1976 – April 11, 2014