कभी कभी खुद पर बड़ा तरस आता है
जब कोशिशों के बाद भी हँसा नहीं जाता है
सिसकियाँ हँसने की ज़िद से कुछ इस तरह डरती हैं
मानों बेवजह खिलखिला कर ख़ुदकुशी करती हैं
आपका राज़ राज़दारों के ज़रिये ही परवान चढ़ता है
कभी कभी ग़म बाँटने से ज़्यादा बढ़ता है
कुंदन होने की छवि , दर्शन दवे बना देती है
और सोने सा तपा तपा के ज़िन्दा जला देती है
मुस्कुराने की बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ती है
जब घुटन जालों की तरह संयम पर चढ़ती है
रब फिर कोई बड़ा दुःख गढ़ता है
जब भी उसका हमसे पाला पड़ता है
वो कहता है तुम्हारे बुरे दिन हैं तुम्हें रोना है
कुछ तो ऐसा ढूंढो जो आगे तुम्हें खोना है
पर इतना पटरी पर चलने वाला शायद उसे पहला दिखा
पर इतना पटरी पर चलने वाला शायद उसे पहला दिखा
और इसीलिए हॉरर शो से भयानक उसने हमारा भविष्य लिखा
उसे खुन्नस थी कि हम अपने हिस्से का ग़म नहीं पी रहे
जैसा लकीरों में लिखा है मर मर के नहीं जी रहे
इसलिए वो उस लाउड ड्रामें को तरस गया
और हम पर बहुत ही खुल कर बरस गया
ये मान लिया गया कि हमें कुछ होता नहीं
लोग कहते हैं बहुत मस्त है अब भी रोता नहीं
बड़ा मुश्किल है जताना कि हम सब भूल गए
बिलकुल बेगुनाह थे फिर भी फंदे पर झूल गए
जानवरों से जानवरों के अंदाज़ में लड़ न सके
तजुर्बेकार शातिरों सी कहानी गढ़ न सके
तब सादा परवरिश में पला अन्दर का बच्चा रो दिया
और जिनसे सब सीखा , उन्हीं पापा को खो दिया
दिल किया के झिंझोड़ के उठाऊँ उन्हें और पूछूं
क्या मिला खूनियों को संयम धैर्य दिखा के
जिस नेकी ने आपको तड़पाया , वो ही मुझे सिखाके
बहुत मुश्किल है छुपाना कि कितना दर्द होता है
जब किसी के वहशीपन में कोई अपनों को खोता है
इसलिए जब लगता है कि मेरा टूटना कुछ शुभचिंतकों को उदास कर देगा
और तमाशबीन दरिंदों में परपीडन का सुख भर देगा
तो मैं फिर से अपने सब सपने संभाल लेता हूँ
और FACEBOOK पर अपनी एक हँसती तस्वीर डाल देता हूँ......
- दर्शन दवे