कभी यादों की कशिश दिल में , कभी बातों की ख़लिश दिल में
पहचाना सा ये तूफ़ां है , अरमानों भरे दिल में ,
टूटा हुआ है सितारा कोई , है अजनबी वो सितारों की महफ़िल में ,
कभी यादों की .......
कभी कभी कुछ अनकही , कभी कभी शिकवे गिले
रह गया कुछ अनसुना , रह गए कुछ फ़ासले
अब भी रोकती हैं , मेरी आहें उसे दिल में
खुद ही ख़ुशी से जैसे मेरा मन आया है मुश्किल में
कभी यादों की .....
यूँ तो मुड़ीं राहें मेरी , पर ज़िन्दगी अब भी वहीं है
हो ना सका ये इल्म भी , क्या है ख़ता और क्या सही है
क़श्ती का भरोसा सबने देखा था साहिल पे
कोई ना जाने कैसे डूबे वो समंदर की हलचल में
कभी यादों की ......
- दर्शन दवे
- दर्शन दवे