Friday, 27 September 2019

यादों की कशिश






कभी यादों की कशिश दिल में , कभी बातों की ख़लिश दिल में 
पहचाना सा ये तूफ़ां है , अरमानों भरे दिल में , 
टूटा हुआ है सितारा कोई , है अजनबी वो सितारों की महफ़िल में , 
कभी यादों की ....... 

कभी कभी कुछ अनकही , कभी कभी शिकवे गिले 
रह गया कुछ अनसुना , रह गए कुछ फ़ासले 
अब भी रोकती हैं , मेरी आहें उसे दिल में 
खुद ही ख़ुशी से जैसे मेरा मन आया है मुश्किल में 
कभी यादों की .....

यूँ तो मुड़ीं राहें मेरी , पर ज़िन्दगी अब भी वहीं है 
हो ना सका ये इल्म भी , क्या है ख़ता और क्या सही है 
क़श्ती का भरोसा सबने देखा था साहिल पे 
कोई ना जाने कैसे डूबे वो समंदर की हलचल में 
कभी यादों की ......  

                                                    
                                                               - दर्शन दवे