रब्बा मुझे भी इस दुनिया के जैसा बना दे ,
कोई कितना खुदको खुद के मरने की सांत्वना दे ,
(सांत्वना - console )
सारी दुनिया उधर है , अब अकेले डर लगता है ,
मेरे जिंदा होने का माना ये भी एक मुग़ालता है ,
( मुगालता - confusion ,misconception )
जो पिघलता नहीं , वो जलने की सज़ा पाता है ,
बाढ़ को सख्त दरख़्त तोड़कर मज़ा आता है ,
अच्छे दिनों की भी कोई याद होती तो अच्छा होता ,
और उस याद की लम्बी मियाद होती तो अच्छा होता ,
(मियाद - duration)
कुछ हो तो मैं रुकूँ वरना चलूँ फिर रुख्सत लूँ ,
शायद तुझे भी याद रहे तेरी मेरी फुरक़त यूँ ,
(फुरक़त - Separation)
कोई आवाज़ नहीं आती जब पलट कर जाने लगता हूँ ,
अपना नाम चीख कर , गूँज खुद ही को सुनाने लगता हूँ ,
ज़िन्दगी ही कहता था मैं तो , लोग कहते हैं नासूर है ,
जीत का हर फलसफा , खूबसूरत हार का दस्तूर है ,
(फलसफा - Philosophy)
तक़दीर बेरहम थी या मैं बेशर्म था , पता नहीं ,
मेरे क़त्ल में , शरीक़ मैं भी था , उसकी खता नहीं ,
जाने तक सभी ने बहुत लिहाज़ किया मेरे हालात का ,
बोझ भी कुछ कम नहीं था उनपर वफ़ा ओ जज़्बात का ,
(वफ़ा ओ जज़्बात - Loyalty and emotions)
जो मैंने संभाला वो सब छीन लिया रुसवाई ने ,
जो बचा वो भी ले लिया तन्हाई ने ,
गर कभी धूप पड़े तुमपर तो फिर बुला लेना ,
ऐसा कुछ कहा कल मुझसे मेरी परछाई ने ......
(रुसवाई - bad mouthing or criticize )
-DD
कोई कितना खुदको खुद के मरने की सांत्वना दे ,
(सांत्वना - console )
सारी दुनिया उधर है , अब अकेले डर लगता है ,
मेरे जिंदा होने का माना ये भी एक मुग़ालता है ,
( मुगालता - confusion ,misconception )
जो पिघलता नहीं , वो जलने की सज़ा पाता है ,
बाढ़ को सख्त दरख़्त तोड़कर मज़ा आता है ,
अच्छे दिनों की भी कोई याद होती तो अच्छा होता ,
और उस याद की लम्बी मियाद होती तो अच्छा होता ,
(मियाद - duration)
कुछ हो तो मैं रुकूँ वरना चलूँ फिर रुख्सत लूँ ,
शायद तुझे भी याद रहे तेरी मेरी फुरक़त यूँ ,
(फुरक़त - Separation)
कोई आवाज़ नहीं आती जब पलट कर जाने लगता हूँ ,
अपना नाम चीख कर , गूँज खुद ही को सुनाने लगता हूँ ,
ज़िन्दगी ही कहता था मैं तो , लोग कहते हैं नासूर है ,
जीत का हर फलसफा , खूबसूरत हार का दस्तूर है ,
(फलसफा - Philosophy)
तक़दीर बेरहम थी या मैं बेशर्म था , पता नहीं ,
मेरे क़त्ल में , शरीक़ मैं भी था , उसकी खता नहीं ,
जाने तक सभी ने बहुत लिहाज़ किया मेरे हालात का ,
बोझ भी कुछ कम नहीं था उनपर वफ़ा ओ जज़्बात का ,
(वफ़ा ओ जज़्बात - Loyalty and emotions)
जो मैंने संभाला वो सब छीन लिया रुसवाई ने ,
जो बचा वो भी ले लिया तन्हाई ने ,
गर कभी धूप पड़े तुमपर तो फिर बुला लेना ,
ऐसा कुछ कहा कल मुझसे मेरी परछाई ने ......
(रुसवाई - bad mouthing or criticize )
-DD