Saturday, 17 March 2012

DEAD FISH


                                               
It was fun to watch life.Our phone contact lists are full of dogs,rats and chameleons,There are so many interesting people who would suddenly disappear in your 'not so good' days ...those who once claimed to be your well wishers and friends when everything was perfect...:)..don't worry..... dogs are dogs they will be nice to you when you will again have biscuits....they will.....even if they know you are talking about them....but the best thing a bad phase in your life gives you is those wonderful people,those 'tigers' ,who approach and unconditionally stand by your side specially in your bleak phase,you get rid of all the garbage of conditional acquaintance ......and just feel like smiling at those bodybuilder rats and beautiful real life actresses who pose ignorant and suddenly run away seeing you in trouble in search of more biscuits being so sure of invulnerability......

.....Be happy,..it's the law of life's roller coaster... what goes down again comes up.All fish left on the shore after a high tide, believe they have abandoned the ocean in its low tide.....It's fun to watch such dead fish floating around....; Sometimes you have to dare to bear and wait to win....and if at all storms do take away anything from you.....it's fear...:)
       
                                                                             - DD
                                              

Friday, 20 January 2012

BEHIND THE SCENES NEGOTIATIONS OF AN ACTOR AND PRODUCER.......:) क्या हालत हो गई है actors की ....HA HA

written  by - DARSHAN DAVE................:)



** क्या हालत हो गई है अभिनेताओं की... !!
Now a days the moment producers quote their budget,actor's genuine reaction is.........

:(  

" Sir are you sure ये शो का हीरो ही है,मतलब main lead ही है क्या सर ??.....इतना तो मेरा ड्राईवर मुझसे ले लेता है सर ,सर मैंने सोचा था मैं remuneration माँगूगा और फिर conveyance भी माँगूंगा पर आप तो remuneration ही conveyance जितना बोल रहे हैं... सर please माँ की दवाइयाँ लानी हैं,बहन के हाथ पीले नहीं हो रहे,लड़के वाले pressure cooker माँग रहे हैं ,पर मेरे ऊपर पहले ही इतना pressure है, कहाँ से लाऊँ ?? एक्टर हुआ तो क्या हुआ,साल में कम से कम एक बार तो मकान का किराया दूँ ,सर दुनिया मेरा fan club खोल के बैठी है और कल बिजली कटने से मेरे घर का  fan  बंद हो गया....सर  internet पर दुनियाँ भर के विडियो पड़े हैं मेरे, पर आपने पाँच बार मेरा audition ले लिया,दो बार लेने के बाद चैनल को लगा मैं शायद t -shirt  के मुकाबले पजामें कुर्ते में कुछ अलग अभिनय करूँगा इसलिये एक बार और audition ,फिर उन्हें लगा कि शायद मैं हरे कुर्ते की जगह लाल कुर्ते में,खिड़की की जगह दरवाज़े के सामने  ज़्यादा किरदार में नज़र आऊँगा इसलिये फिर audition पेल दिया.....मगर इस बार शायद ये check करना था कि कहीं ये हर बार तुक्के में तो अच्छी acting नहीं कर जाता इसलिये इस बार सेट पर बुला कर पचास लोगों के सामने audition ....सर मैं जैसे तैसे हीरो सा बन कर आता रहा, अब पैसे में मत रुलाइये,सर दो साल से ये सोचकर कैमरा face नहीं किया कि एक दिन पैसे वाला काम भी मिलेगा,पर पिछले सीरियल में भी आपने मेरे पूर्व ड्राईवर को हीरो का रोले दे दिया था क्योंकि मैं उसे 5 देता था और आपने उसे 5200 का चेक दे दिया....पूरा आम का season  निकल गया,एक हाफुज़ आम नसीब नहीं हुआ....Hep dude  के look के लिए वो ही चुस्त blouse  जैसी ब्लैक t -shirt और blue jeans , जो तीन साल पहले खरीदी थी,पहन रहा हूँ,socks में और बाकी सब गारमेंट्स में छेद हैं,पर आपको क्या ?,bus  का पास भी spot boy से लेकर बनवाया है,इतना पेट्रोल तो भरवा लूँ कि गाड़ी को रोज़ एक बार स्टार्ट करके बंद कर दूँ ताकि वो चालू हालत में रहे,सर जब पिछला सीरियल चल रहा था तब लोन लिया था,उसके लिए कई चीज़ों के papers security की तरह बैंक को सौंपे थे..बस सौंप ही दिए..............अब तो सब चीज़ो की फोटो खींच कर रख ली है,वापस तो क्या आएँगी  ??
नहीं सर 50,000 से कम नहीं....."
प्रड्यूसर : 5,000
एक्टर : अरे नहीं सर इतना थोड़े ही होता है
प्रड्यूसर : चलिए फिर कभी काम करेंगे साथ में
एक्टर : सर 10,000 तो साइड रोल के मिल जाते हैं
प्रड्यूसर : चलिए फिर कभी काम करेंगे साथ में
एक्टर : सर मैंने तो मेरी पहली शूट के भी 7000 लिए थे
प्रड्यूसर : चलिए फिर कभी काम करेंगे साथ में
एक्टर : सर मुझे बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिल चुका है,और इतनी फेन following है,मैं कभी भी बिना scene याद किये set पर नहीं जाता....इतने कम में तो मेहनत के पैसे भी नहीं बनते .....
प्रड्यूसर : चलिए फिर कभी काम करेंगे साथ में
एक्टर : सर क्योंकि इस बार आपका भी  budget थोडा  tight है, चलिए मैं 6000 कर सकता हूँ,इससे कम थोड़े ही होता है,फिर तो फ्री में ही करवा लीजिये
प्रड्यूसर : चलिए फिर कभी काम करेंगे साथ में
एक्टर : आप भी क्या सर,छोड़िये बात ही नहीं करनी पैसे की,मैं समझूँगा फ्री में काम किया आपके लिए
प्रड्यूसर : आप फिर सोच लीजिये......... सीरियल में एक्टर की ज़रूरत ही नहीं है आजकल,बॉडी अच्छी हो तो एक्टिंग तो editors flash  डाल डाल के करवा लेते हैं,और आपके बाद भी मुझे 65 लड़कों से मिलना है.......तो क्या करना है फिर....
एक्टर : (मन में) अब तू एक बार सीरियल शुरू हो जाने दे , फिर बताता हूँ.......(शब्दों में) सर चलिये दोस्ती में पैसा थोड़े ही देखते हैं....चलिये जैसा आपको ठीक लगे....contract तैयार हो तो sign कर जाऊँ ???

Contract पढ़ने में ऐसा लगता है,

तू खून नहीं कर सकता,उसकी तुझे क़ानूनन इजाज़त नहीं और मैं खून कर दूँ तो उसकी सज़ा तुझे मिलेगी,मेरा पैसा मेरा,मेरा वक़्त मेरा,मेरा हक़ मेरा ,मेरा निर्णय मेरा,मेरा निर्णय तेरा.....तेरा पैसा मेरा,तेरा वक़्त मेरा,तेरा हक़ मेरा ,अधिकार शब्द अभिनेता के परिच्छेद (clause) से लुप्त (absent) होगा,तुझे रखने का अधिकार मेरा ,तुझे निकालने का अधिकार भी मेरा......आजकल तो ये clause भी है की आप अपनी मर्ज़ी से कभी ये serial नहीं छोड़ सकते,आप को कितना पैसा देना है ये मैं तय करूँगा और नहीं दिया तो उसकी वजह भी मैं तय करूँगा और वो कभी देना भी है कि नहीं ये तो बस मैं ही तय करूँगा....बस 12 घंटे काम करेगा (literally) उससे कितने घंटे और ज़्यादा हो जायेंगे,मैं तय करूँगा,और उसका कोई extra पैसा माँगने पर जो मिलना है वो भी मिलेगा कि नहीं,ये भी मैं तय करूँगा .

तू एक बार खायेगा,13  मिनट बाद खाने के टिफिन वापस बंद कर दिये जाएँगे, दिन में मात्र दो बार लघु शंका (toilet) करेगा,वहां 2 मिनट से ऊपर लगे तो पैसा कटेगा....दीर्घ शंका (potty) जाएगा तो उसके लिये निर्माता से लिखित में आज्ञा लेनी होगी,नाक सिनकना  एवं वायु समाधान 12 घंटे की शिफ्ट पूरी होने के बाद ही निर्माता की आज्ञा से संभव हो पाएगा...

शूटिंग शुरू और कुछ वक़्त बाद......

प्रोडूसर का फ़ोन : अरे यार कहाँ हो 3 तीन घंटे लेट हो.....कल चैनल से फ़ोन आया था.....कि तुम्हारे ट्रैक से TRP बढ़ गई है ........जल्दी पहुँचो....

एक्टर : सर डॉक्टर ने कहा है कि मुझे बवासीर (piles ) हो गई है तो मैं अब घर से नहीं निकल पाऊँगा....मेडिकल certificate में भी ऐसा ही लिखा है.....और घर से अब तभी निकल पाऊँगा जब बवासीर में आराम आएगा......और आराम तभी आएगा जब इलाज होगा,इलाज तभी होगा जब पैसे होंगे.....पैसे तो अब तभी हो सकते हैं जब मेरे पैसे बढ़ेंगे वरना अब बवासीर की तासीर तो नसीर से दर्शन तक सब जानते हैं.........!!! :))....!!!

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Wednesday, 29 June 2011

My poem "विज़्डम" dedicated to wisdom ship :)

तक़दीर और प्रसिद्धी में कितना गहरा सम्बन्ध है,
नाम और नियति का ये अनसुलझा द्वन्द है
विज़्डम को देखिये , जीवन भर सामान ढोता रहा 
जब कर्म होता रहा , तो भाग्य सोता रहा
आज जब पुर्ज़े निकल गए ,  तो मृत है
सहारे से खिंचता है , सेवा निवृत है
उसकी लावारिस सी लाश , समंदर किनारे पड़ी दिखी 
मरणोपरांत नियति ने उसकी तक़दीर में शोहरत लिखी 
वैसे भी देखा है कि शवों पर अक्सर ज़्यादा फूल चढ़ते हैं 
किसी के जाने के बाद हम उसके वजूद के कसीदे गढ़ते हैं
चलिए माना के नाम और शोहरत पर तक़दीर का इख्तियार है
जो हुआ जैसे भी हुआ ,  पर विज़्डम आज स्टार है ...... :)
                                                                           -    दर्शन दवे     



Saturday, 29 January 2011

My poem "फेसबुक "......dedicated to papa.



कभी कभी खुद पर बड़ा तरस आता है 
जब कोशिशों के बाद भी हँसा नहीं जाता है
सिसकियाँ हँसने की ज़िद से कुछ इस तरह डरती हैं
मानों बेवजह खिलखिला कर ख़ुदकुशी करती हैं

आपका राज़ राज़दारों के ज़रिये ही परवान चढ़ता है
कभी कभी ग़म बाँटने से ज़्यादा बढ़ता है
कुंदन होने की छवि , दर्शन दवे बना देती है
और सोने सा तपा तपा के ज़िन्दा जला देती है
मुस्कुराने की बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ती है
जब घुटन जालों की तरह संयम पर चढ़ती है 

रब फिर कोई बड़ा दुःख गढ़ता है
जब भी उसका हमसे पाला पड़ता है
वो कहता है तुम्हारे बुरे दिन हैं तुम्हें रोना है
कुछ तो ऐसा ढूंढो जो आगे तुम्हें खोना है 
पर इतना पटरी पर चलने वाला शायद उसे पहला दिखा
और इसीलिए हॉरर शो से भयानक उसने हमारा भविष्य लिखा 
उसे खुन्नस थी कि हम अपने हिस्से का ग़म नहीं पी रहे 
जैसा लकीरों में लिखा है मर मर के नहीं जी रहे
इसलिए वो उस लाउड ड्रामें को तरस गया 
और हम पर बहुत ही खुल कर बरस गया
ये मान लिया गया कि हमें कुछ होता नहीं 
लोग कहते हैं बहुत मस्त है अब भी रोता नहीं

बड़ा मुश्किल है जताना कि हम सब भूल गए
बिलकुल बेगुनाह थे फिर भी फंदे पर झूल गए
जानवरों से जानवरों के अंदाज़ में लड़ न सके
तजुर्बेकार शातिरों सी कहानी गढ़ न सके
तब सादा परवरिश में पला अन्दर का बच्चा रो दिया
और जिनसे सब सीखा , उन्हीं पापा को खो दिया 
दिल किया के झिंझोड़ के उठाऊँ उन्हें और पूछूं 
क्या मिला खूनियों को संयम धैर्य दिखा के 
जिस नेकी ने आपको तड़पाया , वो ही मुझे सिखाके

बहुत मुश्किल है छुपाना कि कितना दर्द होता है
जब किसी के वहशीपन में कोई अपनों को खोता है
इसलिए जब लगता है कि मेरा टूटना कुछ शुभचिंतकों को उदास कर देगा
और तमाशबीन दरिंदों में परपीडन का सुख भर देगा
तो मैं फिर से अपने सब सपने संभाल लेता हूँ 
और FACEBOOK पर अपनी एक हँसती तस्वीर डाल देता हूँ......

                                                    - दर्शन दवे