Wednesday, 26 October 2016

चल यारा

चल यारा एक अच्छी सी ज़िन्दगी बनाते हैं ,
जो मैंने खोया , तूने चाहा , संग पाते हैं ,

पुराने गीत जो दफन हैं गले पन्नों में कब से ,
मौका दस्तूर हो ना हो , गुनगुनाते हैं ,

चल यारा एक अच्छी सी ज़िन्दगी बनाते हैं ...... 

बहुत उजाले बाँटे ग़ैरों की महफिलों में जलकर ,
अब थोड़ा खुदका भी घर जगमगाते हैं ,

गिले शिकवों का कबाड़ भर गया है घर में ,
इस दिवाली ढूंढो उन्हें , जलाते हैं ,

जूझे जागे जला किये , जिये नहीं , जीतेजी जी भर 
आ , मरने से पहले अब थोड़ा तो जी के आते हैं ,

 चल यारा एक अच्छी  सी ज़िन्दगी बनाते हैं .... 

जगह ढूंढा किये बुतों के शहर में अपनी ,
जिन अपनों को छोड़ा , उन्हें फिर बुलाते हैं ,

एक छत खरीदने में सुकून लुट गया पूरा ,
अब चल बाहर , बारिश में नहाते हैं ,

हम तो जागा किये सुबह की चिंता में बरसों ,
आ चलकर अब बच्चों को सुलाते हैं ,

चल यारा एक अच्छी सी ज़िन्दगी बनाते हैं..... 

                                                    - दर्शन दवे 

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