Sunday, 1 July 2012

सास का पति , सास भूतनी बहू सती

Please यार दूरदर्शन के taste को फिर ज़िंदा करते हैं .........lack of ideas की असलियत को हमने public demand का नाम दे दिया ...हमारे daily soaps को दूरदर्शन से माफ़ी माँगनी चाहिये ......


                              हर हफ्ते एक नया सीरियल .......... सास , बहू  , सास का पति , सास भूतनी बहू सती , बहू का दर्द , सास सरदर्द  , सास और बहू  , बहू  का लहू  , सास की आस , बहू  की लाश ,बहू एक मर्दानी , सास ससुरी पुरानी , सास इंजन बहु कार ,सास बहु का प्यार (ये क्या हो गया यार ) ,  बहू वहू सास वास , सास बहू ले जायेगी ,सास का डंडा बहू का बाँस  , बहू की  जान , सास कि साँस , बहू सयानी सास डफर  , सास sauce बहू burger ...पका दिया बस करो ............

                                 हर हफ्ते किसी मनहूस दिन एक नया होर्डिंग और उस पर बैल कि तरह भंगार जैसे गहनों से loaded एक सी उम्र की दो औरतें ,constipated मुँह बना के खड़ी रहने वाली सास ....और हँसने को जो मरी जा रही हो वो बहू ........और उधर ही कहीं एक cardboard  के घर जैसे ,एक फूँक से उड़ जाने वाले सेट की अतरंगी तस्वीर के आगे लिखा होगा ....आई लक्ष्मी अंगना , सास या यशोदा , तुलसी का पौधा ......:/ 
                                 मर्द होर्डिंग और परिवार में mostly मृत होते हैं और जो ज़िंदा होते हैं उनका इतना कम role होता है कि उन्हें मर ही जाना चाहिये, ये मूलतः दिहाडी के मज़दूरों की तरह , मुख्य महिला किरदारों के इर्द गिर्द खड़े होकर या तो दांत निपोड़ रहे होते हैं , या यदा कदा बीच बीच में ....." अरे क्या हो गया भागवान " जैसी पंक्तियाँ बोल कर अगले एपीसोड तक बैठ जाते हैं " पूरा make-up करके सो रही , रो रही अभिनेत्रियाँ kitchen और आटा  पीसने के सीन में इमानदारी से चेहरे पर पानी के छींटे ले लेती हैं और लड़के क्योंकि furniture से खड़े रहते हैं , यहाँ वहाँ गर्दन हिला के protagonist की लाइनों पर ऐसे ही भाव देते पाये जाते हैं कि तू जल्दी बोल ले देवी तो मैं घर जाऊँ ....
                 ढिश ढिश ढिश ढिश pan pan tilt tilt.... tilting is titillating.Flash Flash ,Carbon copy of 'all in 1' expression + close up of 12 characters + budget to be shown in round trolley + crane from U.S to Ukraine........बस हो गई एक्टिंग .....एक सुविधा और दी जा सकती है कि  स्क्रीन पर एक shade card भी दिया जाये ताकि पता चले की हरी flash मतलब ईर्षा , लाल flash बोले तो बन्दे ने गुस्सा किया ....भाव वाले चेहरों का ' भाव ' ज़्यादा  होता है इसलिये  ये युक्ति ज़्यादा मुनाफे वाली है.....

यार और भी explore करने को है दुनिया में .......
दूरदर्शन याद है ??

Nukkad,
Wah janab
Humrahi
Bharat ek khoj
Vikram aur vetaal 
Chanakya
Tamas
Surbhi
Udaan  
Viraasat
Waagle ki duniyaan
Malgudi days 
Circus 
Rajni 
Fauji
Imtihaan
Paying guest
Buniyaad 
Hum log
karamchand
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Rangoli 
ek do teen chaar
Thoda sa aasmaan 
Sigma 
Shri Krishna
Tehkikaat
Swabhimaan 
Dekh bhai dekh
Tenali Rama
Shanti
Neem ka ped 
Phir wahi talash
intezaar aur sahi
Flop show 
gul gulshan gulfaam
Himalaya darshan
Ye duniya gazab ki
Hum panchhi ek daal ke
Honee unhonee
Itihaas  
Jungle book 
Mirza ghalib
kabir
Mr .Yogi
Phool khile hain gulshan gulshan  

....ये था Television.....इसे कहते हैं content ,इसे कहते हैं variety , .गोबर कर के रख दिया इसे , जब creativity का अकाल पड़ जाये , तो कह दो लोगों को यही पसंद है , क्या उस ज़माने में housewives नहीं होती थीं , सासें नहीं होती थीं , या बहुऐं  नहीं होती थीं  ?? शायद अब से ज़्यादा  housewives थीं ...साड़ियाँ , ज्वेलरी और फिल्मों के गानों पर annual function की तरह imitate करते हुए हम television actors क्या कर रहे हैं पता नहीं....ये सब नहीं देखना चाहते थे हम सभी ....

                               जब सब channels एक ही चीज़ परोसेंगे तो लोग उस कचरे में से कुछ चुनने को मजबूर होते हैं , वो लोकप्रियता नहीं hoti ,.....कुछ तो लोग देखेंगे ही घर आकर ....हम अपने lack of ideas को public demand बोले जा रहे हैं , कहीं  , कुछ भी लिख दो ....कोई इतिहास देखने की ज़रूरत नहीं , ज़बान , sets और लिबास पर काम करने का झंझट नहीं .....एक फर्मा बन गया है कौन कैसी लगेगी.....दादी से लेकर पोती तक ...... हमारे यहाँ सबसे creative , dressman होते हैं , actors के  कपड़ों के size तो  बदलते हैं .....

                                  एक सॉफ्टवेर बनाना चाहिये .....सास बहू casino tukka poker software.....बस सब characters का नाम .....लफड़ा  , फोटो पे माला ,  पंगा प्यार थप्पड़ लंबा slow गाना , औरत का ambulance के siren जैसा रोना ........ ये सब अल्फाज़  फीड कर दो , और shuffle का button दबा दो , ये लो ताज़ा episode तैयार ....

               जनता को बेवक़ूफ़ करार कर रखा है कि उन्हें ये ही सब पसंद है , .....ये ना भूलें कि इसी जनता ने बेहतरीन धारावाहिकों से दूरदर्शन को अपनाया था .....वही जनता जो दूरदर्शन के धारावाहिकों के लिये घरों की ओर दौड़ती थी और सड़कें सूनसान हो जाया करती थीं ......वह जनता दूरदर्शन के मनोरंजन और उसके स्तर की इज्ज़त करती थी ....वो medium फिल्मों से ज्यादा लोगों तक पहुँचता था जिसके निर्माता इस विशाल पहुँच का उत्तरदायित्व समझते हुए scripts और content पर उसे अमर बना देने वाली मेहनत करते थे , .....तब उन्हें कभी नहीं लगा की public सिर्फ लाजवंती बहुओं के backless blouse और illegal affairs ही देखना चाहती  है .......क्या degrade कर दिया है हमने इस medium को जो कभी फिल्मों से हज़ार गुना rich था  .....जो आज़ादी हमें मिली थी खुले आकाश में उड़ने की , नया नया सोचने और बनाने की , हमने उसका सत्यानाश कर दिया पैसों के चक्कर में .....कुछ research करने की ज़रूरत नहीं ........25 साल की सुंदरियाँ channel में बैठे बैठे अपने फ़न  में माहिर लोगों को ज्ञान दे देती हैं की किसका किससे टांका भिड़ाने से ...., किसको किससे थप्पड़ पड़वाने से , किसका hairstyle बदलने से TRP बढ़ सकती है ।क्या साहित्य , क्या शोध , क्या अध्ययन , क्या प्रतिभा , क्या क्रियाशीलता ? सब गई चूल्हे में ....अब जिसको भी एक auto rickshaw वाले या पान वाले जितना भी ज्ञान है वो सीरियल की विस्तृत विवेचना करने लायक है .......क्या कर रहे हैं हम ?
                           Creation mesmerize करता है , और जिसमें  substance होता है वो आग की तरह फैलता है ......वो तूफ़ान की तरह असर करता है जिसका ज़र्रे ज़र्रे को पता होता हैं .......वो इतिहास बनता है और जीवन भर याद रहता है ... ऐसी दीवानगी की कोई TRP नहीं होती , रोज़ नहीं सोचना पड़ता की किसकी साड़ी और necklace से TRP  बढ़ सकती है ......please यार चलो फिर television को जिंदा करते हैं .....मुझे लगता है अतीत दोहराने के लिए नहीं , सीखने के लिये  होता है .....!!! कहाँ दूरदर्शन कहाँ दर्शन ....हा हा :)

1 comment:

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